Tuesday, 30 December 2014

Intezar

किसी नजर को तेरा इंतज़ार आज भी है
कहा हो तुम के ये दिल बेकरार आज भी है

वो वादियाँ, वो फज़ायें के हम मिले थे जहां
मेरी वफ़ा का वही पर मज़ार आज भी है

न जाने देख के क्यों उनको ये हुआ एहसास
के मेरे दिल पे उन्हें इख्तियार आज भी है

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