किसी नजर को तेरा इंतज़ार आज भी है कहा हो तुम के ये दिल बेकरार आज भी है वो वादियाँ, वो फज़ायें के हम मिले थे जहां मेरी वफ़ा का वही पर मज़ार आज भी है न जाने देख के क्यों उनको ये हुआ एहसास के मेरे दिल पे उन्हें इख्तियार आज भी है
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